पुनर्वास सेवाएं


कठिन परिस्थितियों की शिकार महिलाओं की सहायता और पुनर्वास की आवश्यकता को स्वीकारते हुए और उनके शोषण को रोकने के लिए राजस्थान महिला राज्य आयोग (RSCW) उन महिलाओं के लिए अस्थायी आवास, पुनर्वास, रखरखाव, परामर्श, व्यावसायिक प्रशिक्षण और कानूनी सहायता सेवाएं प्रदान करता है जो पारिवारिक कलह, सामाजिक बहिष्कार, वेश्यावृत्ति, वित्तीय संकट, मानसिक तनाव, प्राकृतिक आपदाओं इत्यादि के कारण असहाय हो गयी हैं। RSCW द्वारा प्रदत्त सेवाएँ जोखिम मे रह रही महिलाओं के लिए एक सुरक्षा तंत्र के रूप में कार्य करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य हेतु हैं।

आयोग बेसहारा और जरूरतमंद महिलाओं को शॉर्ट स्टे होम्स (लघु ठहराव गृह), महिला सदन और बालिका सदन मे भेजता है। ये पुनर्वास गृह राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग, या केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड, दिल्ली द्वारा चलाए जाते हैं।

आरएससीडबल्यू (RSCW) व्यथित महिलाओं को, जिनके पास आय या परिवार और सामाजिक सहायता का कोई स्रोत नहीं है, आपातकालीन हदेतर सेवाएं प्रदान करता है। ऐसी महिलाएं जो कठिन परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर हैं, उन्हे नि: शुल्क आवास, भोजन, चिकित्सा, परामर्श और कानूनी सहायता प्रदान की जाती हैं। लाभार्थियों को लाभप्रद रूप से रोजगार योग्य संवर्धित करने हेतु कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। उद्देश्य बेसहारा महिलाओं को आत्मनिर्भर और उनके जीवन को बेहतर बनाने का होता है ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

परिकल्पना:

हम कठिन परिस्थितियों में रहने वाले महिलाएं जिन्हे पारिवारिक, आर्थिक या सामाजिक सहायता प्राप्त नही है, को संस्थागत सहायता ढांचा प्रदान करने कि अनुषंशा रखते हैं ताकि वे अपनी मूलभूत आवश्यकताओं जैसे भोजन, आश्रय, कपड़े और आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा की पूर्ति कर सकें। ऐसी महिलाओं को किसी भी परिस्थिति में परित्यक्त नहीं किया जाना चाहिए जिससे उनको शोषण और बरबादी हो सकती है। उन्हे आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जाएंगे ताकि वे गरिमामयी और विश्वास से पूर्ण जीवन व्यतीत कर सकें।

उद्देश्य:

·         बेसहारा महिलाओं को आर्थिक और भावनात्मक रूप से पुनर्वासित करना।

·         वो महिलाएं जिनके पास कोई भी पारिवारिक, सामाजिक या स्वतंत्र वित्तीय सहायता उपलब्ध नही है, को भोजन, आवास, कपड़े और स्वास्थ्य के लिए प्राथमिक सहायता प्रदान करना।

·         व्यथित महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए और नए सिरे से जीवन शुरू करने के लिए सक्षम करना।

·         संकटग्रस्त महिलाओं के लिए एक सहायता केंद्र के रूप में कार्य करना।

लाभार्थी:

·         18 वर्ष से ऊपर की निम्न श्रेणी की महिलाएँ आरएससीडबल्यू (RSCW) की पुनर्वास सुविधाओं का लाभ उठा सकती हैं:-

·         परित्यक्त महिलाएं जिनके पास कोई भी पारिवारिक या सामाजिक सहायता उपलब्ध नही हैं।

·         प्राकृतिक आपदाओं की महिला उत्तरजीवी जो निर्वाह के किसी भी साधन के बिना बेघर हो गयी हैं।

·         घरेलू हिंसा, तलाकशुदा या वैवाहिक जीवन में कलह, अपराध, आदि की महिला पीडिताएँ।

·         वो महिलाएं जिन्हे पारिवारिक क्लेश के कारण किसी भी वित्तीय सहायता के बिना उनके परिवार से बेदख़ल किया गया है।

·         वेश्यालयों से बचाई गयी या वेश्यालयों से भागी महिलाएं।

·         एचआईवी और एड्स से प्रभावित महिलाएँ।

18 वर्ष से कम उम्र की बेसहारा लड़कियों को बालिका सदन में रखा जाएगा। 18 वर्ष तक की लड़कियों और 12 वर्ष तक के लड़कों को पुनर्वास केंद्र में अपनी मां के साथ रहने दिया जाएगा। 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को वृद्धाश्रम (ओल्ड ऐज़ होम) में रखा जाएगा।

सहायक सेवाएं:

व्यावसायिक प्रशिक्षण: आश्रितों को राज्य रोजगार एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण और परीक्षा शुल्क की प्रतिपूर्ति संस्थान द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्र को प्रस्तुत करने पर की जाएगी।

परामर्श: आश्रितों को भावनात्मक सहारा और कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए परामर्श प्रदान किया जाएगा।

स्वास्थ्य सेवाएँ: नागरिक (सिविल) और सरकारी अस्पतालों के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

कानूनी सहायता: आश्रितों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी।